Thursday, February 24, 2011

ग़ज़ल: तितलियाँ अच्छी लगीं

चित्र गूगल से साभार 
एक गज़ल -तितलियाँ अच्छी लगीं 
फूल, जंगल, झील, पर्वत घाटियाँ अच्छी लगीं 
दूर तक बच्चों को उड़ती तितलियाँ अच्छी लगीं |

जागती आँखों ने देखा इक मरुस्थल दूर तक 
स्वप्न में जल में उछ्लतीं मछलियाँ अच्छी लगीं |

मूंगे -माणिक से बदलते हैं कहाँ किस्मत के खेल 
हाँ मगर उनको पहनकर उँगलियाँ अच्छी लगीं |

देखकर मौसम का रुख तोतों के उड़ते झुंड को 
पके गेहूं की सुनहरी बालियाँ अच्छी लगीं |

दूर थे तो सबने मन के बीच सूनापन भरा 
तुम निकट आये तो बादल बिजलियाँ अच्छी लगीं |

उसके मिसरे पर मिली जब दाद तो मैं जल उठा 
अपनी ग़ज़लों पर हमेशा तालियाँ अच्छी लगीं |

जब जरूरत हो बदल जाते हैं शुभ के भी नियम 
घर में जब चूहे बढे तो बिल्लियाँ अच्छी लगीं |


चित्र -गूगल से साभार 

[मेरी यह ग़ज़ल आजकल फरवरी 2007 में प्रकाशित है ]

10 comments:

  1. जब जरूरत हो बदल जाते हैं शुभ के भी नियम
    घर में जब चूहे बढे तो बिल्लियाँ अच्छी लगीं |

    बहुत खूब कहा है .....बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  2. तुषार जी कमाल किया है आपने...इस ख़ूबसूरती से काफिये पिरोये हैं आपने ग़ज़ल में के दिल से वाह वाह निकल रही है...हर शेर बेहतरीन है...किसी एक को कोट करना बाकी शेरों के साथ ना इंसाफी होगी...
    मेरी दिली दाद कबूल फरमाएं...

    नीरज

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  3. उसके मिसरे पर मिली जब दाद तो मैं जल उठा
    अपनी ग़ज़लों पर हमेशा तालियाँ अच्छी लगीं

    बहुत बढ़िया .... मन खोल दिया आपने....

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  4. खूबसूरत भाव ग़ज़ल मेँ ।
    सलाम

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  5. आप सभी का भाई नीरज जी मोनिका जी सदा जी भाई ओम कश्यप जी आभार |

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  6. उसके मिसरे पर मिली जब दाद तो मैं जल उठा
    अपनी ग़ज़लों पर हमेशा तालियाँ अच्छी लगीं |

    बहुत खूब! बहुत सुन्दर गज़ल..

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  7. जागती आँखों ने देखा इक मरुस्थल दूर तक
    स्वप्न में जल में उछ्लतीं मछलियाँ अच्छी लगीं |

    मूंगे -माणिक से बदलते हैं कहाँ किस्मत के खेल
    हाँ मगर उनको पहनकर उँगलियाँ अच्छी लगीं |

    achchi GAZAL

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  8. tushar ji
    aapki yeh gazal sach much bohot achhi lagi

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  9. फूल, जंगल, झील, पर्वत घाटियाँ अच्छी लगीं
    दूर तक बच्चों को उड़ती तितलियाँ अच्छी लगीं |

    सुन्दर गज़ल .. सुंदर भावाभिव्यक्ति.

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  10. aap aur aapki kavitaaen dono bejod hain...aisa main isliye kh rha hoon kyon ki main vyaktigt roop se aap ko jaanta hu aur aapko apne roobaroo kavypaath karte suna bhi hai.apni is alag si pahchaan ke saath aage badhate rahiye...meri haardik shubhkaamnaayen sdaa aapke saath hain....

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