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| चित्र -गूगल से साभार |
आरती में
और होंगे
थाल में उनको सजाओ |
मैं दिया
पगडंडियों का
मुझे पथ में ही जलाओ |
सिर्फ दीवाली
नहीं मैं
मुश्किलों में भी जला हूँ ,
रौशनी को
बाँटने में
मोम बनकर भी गला हूँ ,
तम न
जीतेगा हंसो
फिर रौशनी के गीत गाओ |
लौ हमारी
खेत में ,
खलिहान में फैली हुई है ,
यह
हवाओं में
नहीं बुझती ,नहीं मैली हुई है ,
धुआं भी
मेरा ,नयन की
ज्योति है काजल बनाओ |
गहन तम
में भी जगा हूँ
नींद में सोया नहीं हूँ ,
मैं गगन के
चंद्रमा की
दीप्ति में खोया नहीं हूँ ,
देखकर
रुकना न मुझको
मंजिलों के पास जाओ |
राह में
चलते बटोही की
उम्मीदें ,हौसला हूँ ,
दीप का
उत्सव जहाँ हो
रौशनी का काफिला हूँ ,
ओ सुहागन !
मुझे आंचल में
छिपाकर मत रिझाओ |

