Wednesday, April 4, 2012

एक गीत -आदिम युग से चिड़िया गाना गाती है

चित्र -गूगल से साभार 
एक गीत
आदिम युग से चिड़िया गाना गाती है
मौसम की  
आँखों से 
आँख मिलाती है |
आदिम 
युग से 
चिड़िया गाना गाती है |

आँधी -
ओले ,बर्फ़ 
सभी कुछ सहती है ,
पर अपनी 
मुश्किल 
कब हमसे कहती है ,
बच्चों को 
राजा को 
सबको भाती है |

एक घोंसले 
में चिड़िया 
रह लेती है ,
अंडे -बच्चे 
सभी उसी 
में सेती है ,
नर से 
मादा अपनी 
चोंच लड़ाती है |

चिड़िया 
जंगल की 
आँखों का ऐनक है ,
सुबहों 
संध्याओं की 
इससे रौनक है ,
सुख -
दुःख की 
चिट्ठी -पत्री पहुँचाती है |

आसमान 
यादों का 
जब भी नीला हो ,
सना हुआ 
आटा 
परात में गीला हो ,
मुंडेरों से 
उड़कर 
चिड़िया आती है |
चित्र -गूगल से साभार 

9 comments:

  1. बहुत खूब..।

    अंतिम बंद तो दिल के तार हिला जाते हैं।

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  2. चिड़िया नहीं हो सकते क्या हम ? बहुत सुन्दर गीत!

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  3. मौसम की
    आँखों से
    आँख मिलाती है |
    आदिम
    युग से
    चिड़िया गाना गाती है |
    सुन्दर गीत !

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  4. बहुत खूब, चिड़िया का गाना बहुत भाता है।

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  5. चिड़ियों का कलरव...जीवंत कर दिया...

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  6. चिड़िया
    जंगल की
    आँखों का ऐनक है ,
    सुबहों
    संध्याओं की
    इससे रौनक है ,
    सुख -
    दुःख की
    चिट्ठी -पत्री पहुँचाती है |

    .बहुत प्यारी रचना ...

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  7. बहुत सुन्दर

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