Thursday, 18 December 2014

एक देशगान -कितना सुन्दर ,कितना प्यारा, देश हमारा है

लाल किला -चित्र गूगल से साभार 



एक देशगान -कितना सुन्दर, कितना प्यारा 
देश हमारा है 

कितना सुंदर 
कितना प्यारा 
देश हमारा है |
नीलगगन के 
सब तारों में 
यह ध्रुवतारा है |

पर्वत -घाटी 
तीर्थ, सलोना 
इसे बनाते हैं ,
सारे पावन 
ग्रन्थ यहाँ की 
महिमा गाते हैं ,
लोकरंग में 
गीत सुनाता 
यह बंजारा है |

सत्य -अहिंसा 
दया -धर्म का 
इससे नाता है ,
युद्ध थोपने वालों 
को यह 
सबक सिखाता है ,
इसका प्रहरी 
पर्वत है 
सागर की धारा है |

हर मौसम के 
रंग यहाँ 
फूलों की घाटी है ,
अनगिन 
वीर शहीदों की 
यह पावन माटी है ,
सत्यमेव जयते 
इसका 
सदियों से नारा है |

गीतकार-जयकृष्ण राय तुषार
चित्र -गूगल से साभार 

9 comments:

  1. बहुत सुंदर गीत मनभावन ....

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (19-12-2014) को "नई तामीर है मेरी ग़ज़ल" (चर्चा-1832) पर भी होगी।
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. बहुत सुन्दर रचना ....गणतंत्र दिवस पर बच्चों के लिए खासतौर पर महत्वपूर्ण

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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  5. इस बंजारे का मनभावन गीत (लोकगीत सा सहज ग्राह्य )मुग्ध कर गया !

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  6. आप पूरे देश की खूबसूरती को इतने सरल और साफ़ शब्दों में दिखाते हो कि पढ़ते-पढ़ते चेहरे पर अपने आप मुस्कान आ जाती है। मुझे अच्छा लगता है कि आप किसी भारी भाषा का सहारा नहीं लेते, फिर भी हर लाइन दिल तक पहुँची रहती है।

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