| चित्र -गूगल से साभार |
हन्टर
बरसाते दिन
मई और जून के |
खुजलाती
पीठों पर
कब्जे नाख़ून के |
जेठ की
दुपहरी में
सोचते आषाढ़ की ,
सूखे की
चिन्ता में
कभी रहे बाढ़ की ,
किससे
हम दर्द कहें
हाकिम ये दून के |
हाँफ रही
गौरय्या
चोंच नहीं दाना है ,
इस पर भी
मौसम का
गीत इसे गाना है ,
भिक्षुक को
आते हैं
सपने परचून के |
आचरण
नहीं बदले
बस हुए तबादले ,
जनता के
उत्पीड़क
राजा के लाडले ,
कटे हुए
बाल हुए
हम सब सैलून के |
मूर्ति के
उपासक ही
मूरत के चोर हुए ,
बापू के
चित्र टांग
दफ़्तर घूसखोर हुए ,
नेता के
दौरे हैं रोज
हनीमून के |
पैमाइस के
झगड़े
फर्जी बैनामे हैं ,
सरपंचों की -
लाठी और
सुलहनामे हैं ,
अख़बारों
पर छींटे
रोज सुबह खून के |
![]() |
| चित्र -गूगल से साभार |
