Monday, May 7, 2018

आस्था का गीत -राम का पावन चरित





एक आस्था का गीत -राम का पावन चरित 

राम का 
पावन चरित 
इस देश का अभिमान है |

वेदपाठी 
दास  तुलसी 
राम को पहचानते हैं ,
शैव -वैष्णव 
नाथ इनको
जानते हैं मानते हैं ,
राम की 
उपमेय ,उपमा 
और नहीं उपमान है |

एक योगी ने 
जलाए दीप 
अगणित नभ प्रकाशित ,
धार सरयू 
की मलिन ,
होने लगी फिर से सुवासित ,
राम का 
कुल गोत्र इस 
ब्रह्माण्ड का दिनमान है |



Saturday, May 5, 2018

एक प्रेम गीत -कुछ फूलों के कुछ मौसम के

चित्र -गूगल से साभार 




एक पेमगीत -कुछ फूलों के  कुछ मौसम के 
कुछ फूलों के 
कुछ मौसम के 
रंग नहीं अनगिन |
तुम्हे देखकर 
बदला करतीं 
उपमाएं पल -छिन |

एक सुवासित 
गन्ध हवा में 
छूकर तुमको  आती ,
राग बदलकर 
रंग बदलकर 
प्रकृति सहचरी गाती ,
तुम हो तो 
मन्दिर की सुबहें 
संध्याएँ ,शुभ दिन |

स्वप्न कथाओं में 
हम कितने 
खजुराहो गढ़ते ,
अनपढ़ ही 
रह गए तुम्हारे 
शब्द भाव पढ़ते ,
तुम तो धवल 
कंवल सी जल में 
हम होते पुरइन |

लहरों पर 
जलते दीपों की 
लौ तेरी ऑंखें ,
तुम्हें देख 
शरमाती 
फूलों की कोमल शाखें ,
तुम्हें उर्वशी ,
रम्भा  लिख दूँ 
या लिख दूँ आसिन |
चित्र -साभार गूगल 

Monday, April 30, 2018

एक गीत -फूलों की आँखों में जल है

चित्र -साभार गू

इस बदले 
मौसम से जादा 
फूलों की आँखों में जल है |
हदें पार 
कर गयी सियासत 
राजनीति में छल ही छल है |

अहि जा लिपटे 
वन मयूर से 
घोरी से मिल गए अघोरी ,
नैतिकता 
ईमान खूटियों पर 
संध्याएँ गाती लोरी ,
गंगा में 
टेनरियों का जल 
पूजाघर में गंगा जल है |

जंगल के 
सीने पर आरी 
क्या होगा इस नंदन वन का ,
दूषित समिधा 
हवनकुंड में 
उँगलियों में नकली मनका .
ग्रह गोचर शुभ 
विजय भाव है 
फिर माथे पर कैसे बल है |

Sunday, April 29, 2018

एक गीत -सूर्य तो उगता रहा हर दिन




चित्र -गूगल से साभार 


एक गीत -सूर्य तो उगता रहा हर दिन 

सूर्य तो 
उगता रहा हर दिन |
मगर कुछ 
वन फूल 
अब भी हैं अँधेरे में |

साँझ ढलते 
रक्त में डूबा 
नदी का जल ,
शोर -चीखों 
का कभी 
निकला न कोई हल ,
कहीं कुछ 
तो चूक है 
उजले सवेरे में |

अन्नदाता 
आपदा की 
जंग में हारे ,
प्यास से 
व्याकुल रहे 
कुछ भूख के मारे ,
इन्द्र प्रमुदित 
बिना जल के 
मेघ घेरे में |

ढूंढ़ता है 
रोज आदमखोर 
मृगनयनी ,
नर्मदा की 
चीख कब 
सुनती है उज्जयिनी ,
डबडबायी 
आंख 
जंगल के बसेरे में |
चित्र -गूगल से साभार 

Friday, March 9, 2018

एक गीत -सुख नहीं उधार लो

चित्र --साभार गूगल 


एक ताज़ा गीत -सुख नहीं उधार लो 

धूल जमे 
रिश्तों को 
फूल से बुहार लो |
बिखर गए 
जुड़े सा 
इन्हें भी संवार लो |

अफवाहों के 
बादल 
मौसम का दोष नहीं ,
नीड़ों से 
दूर उड़े 
पंछी को होश नहीं ,
अनचाहे 
पेड़ों से 
इन्हें भी उतार लो |

दरपन भी 
हँसता है 
हंसी को बिखेर दो ,
मौन 
गुनगुनाएगा 
वंशी को टेर दो ,
दुःख अपना 
मत बांटो
सुख नहीं उधार लो |

कुछ जादू -टोने 
भी 
आसपास रहते हैं ,
निर्मल 
जलधारा में 
विषधर सा बहते हैं ,
काजल के 
टीके से 
नज़र को उतार लो |
चित्र -गूगल से साभार 

Wednesday, February 14, 2018

प्रेम दिवस पर एक ताज़ा गीत -महलों की पीड़ा मत सहना



चित्र -साभार गूगल 


एक गीत -महलों की पीड़ा मत सहना 

महलों की 
पीड़ा मत सहना 
आश्रम में रह जाना |
अब शकुंतला 
दुष्यंतों के 
झांसे में मत आना |

इच्छाओं के 
इन्द्रधनुष में 
अनगिन रंग तुम भरना ,
कोपग्रस्त 
ऋषियों के 
शापों से किंचित मत डरना ,
कभी नहीं 
अब गीत रुदन के 
वन प्रान्तर में गाना |

अबला नारी 
एक मिथक है 
इसी मिथक को तोड़ो ,
अपनी शर्तों पर 
समाज से 
रिश्ता -नाता जोड़ो ,
रिश्तों का 
आधार अंगूठी 
हरगिज नहीं बनाना |

प्रेम वही 
जो दंश न देता 
यह गोकुल ,बरसाने ,
इसे राजवैभव 
के मद में 
डूबा क्या पहचाने ,
एक नया 
शाकुंतल लिखने 
कालिदास फिर आना |
चित्र -साभार गूगल 

Wednesday, January 17, 2018

एक गीत -यह वसंत भी प्रिये ! तुम्हारे होठों का अनुवाद है


चित्र -गूगल से साभार 




एक गीत -यह वसंत भी प्रिये !
 तुम्हारे होठों का अनुवाद है 

तुमसे ही 
कविता में लय है 
जीवन में संवाद है |
यह वसंत भी 
प्रिये ! तुम्हारे 
होठों का अनुवाद है |

तुम फूलों के 
रंग ,खुशबुओं में 
कवियों के स्वप्नलोक में ,
लोककथाओं 
जनश्रुतियों में 
प्रेमग्रंथ में कठिन श्लोक में ,
जलतरंग पर 
खिले कमल सी 
भ्रमरों का अनुनाद है |

तुम्हें परखने 
और निरखने में 
सूखी कलमों की स्याही ,
कालिदास ने 
लिखा अनुपमा 
हम तो एक अकिंचन राही
तेरा हँसना 
और रूठना 
प्रियतम का आह्लाद है |
चित्र -गूगल से साभार