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एक पुराना लोकभाषा गीत -चुहुल ननद भौजाई कै
चित्र साभार गूगल एक पुराना लोकभाषा गीत लोकसंस्कृति, गाँव की रौनक़, उत्सवजीविता को, लोकपरम्परा को याद करती लोकभाषा कविता.सादर अभिवादन सहित...
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चित्र -साभार गूगल एक ग़ज़ल-चाँदनी का रंग भी सादा न था प्यार करने का कोई वादा न था पर तेरी नफ़रत का अंदाजा न था बाद की जंगों में रावण बच गए...
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चित्र -गूगल से साभार प्यार के हम गीत रचते हैं इन्हीं कठिनाइयों में खिल रहा है फूल कोई धान की परछाइयों में | सो रहे खरगोश से दिन पर्...
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चित्र साभार गूगल एक गीत-चाँदनी निहारेंगे रंग चढ़े मेहँदी के मोम सी उँगलियाँ । धानों की मेड़ों पर मेघ औ बिजलियाँ । खुले हुए जूड़े और बच्चों के...