Thursday, January 13, 2011

यह प्रयाग है: आस्था की भूमि



यह प्रयाग है यहाँ धर्म की ध्वजा निकलती है 
यह प्रयाग है
यहां धर्म की ध्वजा निकलती है
यमुना आकर यहीं
बहन गंगा से मिलती है।


संगम की यह रेत
साधुओं, सिद्ध, फकीरों की
यह प्रयोग की भूमि,
नहीं ये महज लकीरों की
इसके पीछे राजा चलता
रानी चलती है।


महाकुम्भ का योग
यहां वर्षों पर बनता है
गंगा केवल नदी नहीं
यह सृष्टि नियंता है
यमुना जल में, सरस्वती
वाणी में मिलती है।


यहां कुमारिल भट्ट
हर्ष का वर्णन मिलता है
अक्षयवट में धर्म-मोक्ष का
दीपक जलता है
घोर पाप की यहीं
पुण्य में शक्ल बदलती है।


रचे-बसे हनुमान
यहां जन-जन के प्राणों में
नागवासुकी का भी वर्णन
मिले पुराणों में
यहां शंख को स्वर
संतों को ऊर्जा मिलती है।


यहां अलोपी, झूंसी,
भैरव, ललिता माता हैं
मां कल्याणी भी भक्तों की
भाग्य विधाता हैं
मनकामेश्वर मन की
सुप्त कमलिनी खिलती है।


स्वतंत्रता, साहित्य यहीं से
अलख, जगाते हैं
लौकिक प्राणी यही
अलौकिक दर्शन पाते हैं
कल्पवास में यहां
ब्रह्म की छाया मिलती है।
पीठाधीश्वर जूना अखाड़ा स्वामी श्री अवधेशानन्द गिरी जी महाराज के श्रीचरणों में सादर समर्पित
चित्र से article.wn.com  साभार

31 comments:

  1. ऐसी आस्था की भूमि को हमारा भी नमन ... उम्दा प्रस्तुति ... शुभकामनाएँ

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  2. is kavita/geet ko maine 2001 ke prayag ke mahakumbha me swami awdheshanand giriji maharaj ko samarpit kiya tha.yeh ek aastha se judi hui kavita hai.aap bhi iska aanand uthayen.

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  3. संगम की यह रेत
    साधुओं, सिद्ध, फकीरों की
    यह प्रयोग की भूमि,
    नहीं ये महज लकीरों की
    इसके पीछे राजा चलता
    रानी चलती है।
    Prayag ki itni sundar tasveer nahi dekhi, Badhai.

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  4. ऐसी आस्था की भूमि को हमारा भी नमन|

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  5. यहां कुमारिल भट्ट
    हर्ष का वर्णन मिलता है
    अक्षयवट में धर्ममोक्ष का
    दीपक जलता है
    घोर पाप की यहीं
    पुण्य में शक्ल बदलती है।

    तीर्थराज प्रयाग की महिमा का भक्तिमय वर्णन करती यह पवित्र रचना बहुत अच्छी लगी।

    तुषार जी, शुभकामनाएं स्वीकार करें।

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  6. सक्रांति के पावन पर्व पर प्रयाग की पवित्र भूमि को प्रणाम..... सुंदर रचना .....

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  7. लगा कि किसी सत्संग में आ गया....बड़ी शांति मिली, खास तौर पर स्वामी अवधेशानंद को देखकर ! लगा कि गुरुदर्शन हो गए ....

    जबकि मैं आम तौर पर आस्तिक नहीं हूँ .....

    इनके बारे में अधिक जानना है
    अगर कभी कुछ लिखें तो सूचित करने का कष्ट अवश्य करें !

    आभार !

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  8. सक्रांति ...लोहड़ी और पोंगल....हमारे प्यारे-प्यारे त्योंहारों की शुभकामनायें आपको भी .....सादर

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  9. जय कृष्ण तुषार जी !! तीर्थराज प्रयाग पर सुन्दर रचना .. मकर संक्रांति पर हार्दिक बधाइयाँ ... आपकी कविता आज चर्चामंच पर है ...आपका सादर शुक्रिया


    http://charchamanch.uchcharan.com/2011/01/blog-post_14.html

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  10. तीर्थराज प्रयाग को नमन .
    बहुत ही सुन्दर सरल शब्दों में आप ने इस रचना में सम्पूर्ण वर्णन कर दिया है.
    प्रभावी प्रस्तुति .

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  11. तीर्थराज प्रयाग को नमन .
    बहुत ही सुन्दर सरल शब्दों में आप ने इस रचना में सम्पूर्ण वर्णन कर दिया है.
    प्रभावी प्रस्तुति .

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  12. वाह... आपने बनारस और महाकुम्भ को शब्दों में बहुत सुन्दरता से ढाल दिया...मकर संक्रांति, लोहरी एवं पोंगल की हार्दिक शुभकामनाएं...

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  13. पावन भूमि प्रयाग को नमन है...

    नीरज

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  14. prayag raj ki mahima ko bahut hi sundar shabdon me piroya hai aapne .badhai .mere blog ''kaushal ''par ane ke liye hardik dhanywad .aate rahiyega .

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  15. तीर्थराज प्रयाग को नमन.बहुत सुन्दर प्रस्तुति.लोहड़ी और मकर संक्रांति की हार्दिक शुभ कामनायें !

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  16. संक्रांति के पावन अवसर पर तीर्थ राज प्रयाग का अनुपम शब्द चित्र !
    तुषार जी बहुत बहुत धन्यवाद !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  17. पुरे इतिहास ..समाज और संस्कृति का परिचय करवा दिया आपने अपनी इस कविता के माध्यम से ..बहुत बढ़िया

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  18. सुंदर रचना के लिए साधुवाद ढ़ेर सारी बधाईयाँ !
    लोहड़ी, पोंगल एवं मकरसंक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं!

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  19. आपकी रचनाएं अच्छी लगीं । विशेषतः प्रेमगीत ,नये साल की तस्वीर ,स्वागत दिनमान आदि ।

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  20. पुरानी बातें ताजा हो गयी इस पोस्ट के साथ.......... पिछली साल हम भी बाबा अवधेशानंद गिरी जी के पंडाल में गये थे. सुंदर प्रस्तुति. आभार.

    नये दशक का नया भारत ( भाग- २ ) : गरीबी कैसे मिटे ?

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  21. aadarniya poojaji banaras ko kashi aur allahabad ko prayag kaha jata hai.yeh rachana allahabad/prayag ke mahakumbha per likhi gayi hai/bbanaras nahin

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  22. aadarniya poojaji banaras ko kashi aur allahabad ko prayag kaha jata hai.yeh rachana allahabad/prayag ke mahakumbha per likhi gayi hai/bbanaras nahin

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  23. प्रयाग महात्म पर बढ़िया रचना !

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  24. महाकुम्भ का योग
    यहां वर्षों पर बनता है
    गंगा केवल नदी नहीं
    यह सृष्टि नियंता है
    यमुना जल में, सरस्वती
    वाणी में मिलती है ..

    प्रयाग की इस पावन धरती को हमारा शत शत नमन है ...

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  25. मुझे तो इलाहाबाद बहुत अच्छा लगता है.

    _________________________
    'पाखी की दुनिया' में 'अंडमान में एक साल...'

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  26. खूबसूरत प्रस्तुति

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  27. यह प्रयाग है
    यहां धर्म की ध्वजा निकलती है
    यमुना आकर यहीं
    बहन गंगा से मिलती है।

    आपकी आस्था का प्रणाम ....!!

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