Monday, 13 April 2020

एक गीत -हम हैं एक सिपाही अपना फर्ज़ निभाते हैं



भारतीय पुलिस ,प्रशासनिक अधिकारियों एवं उनके परिवारों को समर्पित एक कविता /गीत 

समय के साथ भारतीय पुलिस का चेहरा काफी कुछ बदल रहा है लेकिन वर्दी के रुतबे के भीतर भी एक दर्द छिपा रहता है जो किसी से कहा नहीं जाता किसी से सुना नहीं जाता | वर्तमान वैश्विक महामारी में पुलिस अपना कार्य बहुत पेशेवर और मानवीय ढंग से कर रही है | पुलिस का कार्य काफी चुनौतीपूर्ण होता है अनेकों दबावों के साथ उन्हें अपना फ़र्ज़ निभाना पड़ता है | यह गीत पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को समर्पित है जो अपने कर्तव्य पथ पर शहीद हो गये हैं | यह  गीत भारतीय पुलिस सेवा के सभी अधिकारियों ,प्रान्तीय पुलिस अधिकारियों एवं पुलिस कर्मियों को समर्पित है |



एक गीत -
हम हैं एक सिपाही अपना फर्ज़ निभाते हैं 

पत्थर खाते 
गाली खाते 
गोली खाते हैं |
हम हैं एक
सिपाही अपना
फ़र्ज़ निभाते हैं |

नीलकंठ 
बन रोज हलाहल 
हम भी पीते हैं ,
पत्नी ,बच्चे 
उत्सव ,मेला 
छोड़ के जीते हैं ,

राजा जैसा 
कहता वैसा 
गीत सुनाते हैं |

होली ,ईस्टर 
ईद ,मोहर्रम 
आप मनाते हैं ,
हम तो केवल 
अमन चैन 
की राह बनाते हैं ,

लावारिस  
लाशों को भी  
हम रोज उठाते हैं |

बारिश ,आँधी 
ओले ,पत्थर
सब कुछ सहते हैं ,
गुण्डों से 
धमकी मिलती 
हम किससे  कहते हैं ,

फर्ज़ निभाने 
में हम अक्सर 
जान गँवाते हैं |

कोर्ट -कचहरी 
केस डायरी 
दबिश ,गवाही है ,
ह्यूमन राइट 
मुज़रिम के संग 
नई तबाही है ,

फिर भी 
सिंघम बनकर 
कुछ तो न्याय दिलाते हैं |

काँटों वाले 
जंगल से 
फूलों को चुनते हैं ,
डी० एम ० 
सी०एम०,अख़बारों 
की सबकी सुनते हैं ,

वर्दी के 
रुतबे में 
सारा दर्द छिपाते हैं | 

कवि -जयकृष्ण राय तुषार 
चित्र -गूगल से साभार -सिंघम 



18 comments:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में मंगलवार 14 एप्रिल 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    Replies
    1. आदरणीया यशोदा जी आपका हार्दिक आभार

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  2. बहुत सुन्दर

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    Replies
    1. आपका हार्दिक आभार भाई साहब |

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  3. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (14-4-2020 ) को " इस बरस बैसाखी सूनी " (चर्चा अंक 3671) पर भी होगी,
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    ---
    कामिनी सिन्हा

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    Replies
    1. आदरणीया कामिनी जी आपका हार्दिक आभार

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  4. बेहतरीन प्रस्तुति ! बहुत सुंदर !

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  5. गज़ब , बेहद खूबसूरत प्रभावी गीत

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    Replies
    1. आदरणीय को सादर प्रणाम और हार्दिक आभार |

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  6. वाह तुषार जी | सिपाही के मन के सब भाव पिरो दिए , बड़ी ही खूबसूरती से |

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    1. आदरणीया रेणु जी आपकी टिप्पणी मंत्रमुग्ध कर देती है |आपका हृदय से आभार |

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  7. कोर्ट -कचहरी
    केस डायरी
    दबिश ,गवाही है ,
    ह्यूमन राइट
    मुज़रिम के संग
    नई तबाही है ,
    फिर भी
    सिंघम बनकर
    कुछ तो न्याय दिलाते हैं |
    वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर।

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    Replies
    1. आदरणीय सुधा जी आपका हार्दिक आभार |

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  8. बहुत बढ़िया

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