Thursday, April 7, 2016

एक गीत -माँ भी तो गंगा सी बहती है



चित्र /पेंटिग्स गूगल से साभार 


एक गीत -माँ भी तो गंगा सी बहती है 

रिश्तों का 
दंश 
रोज सहती है |
माँ भी 
तो गंगा -
सी बहती है |

मौसम 
से भी 
पहले बदली है,
निर्गुण है 
सोहर है 
कजली है ,
दुविधा में 
कभी 
नहीं रहती है |

भोलापन 
उसकी 
कमजोरी है ,
लोककथा 
बच्चों की 
लोरी है ,
गीता है 
माँ !
सच ही कहती है |

सब अपने 
ही
उसको छलते हैं ,
थके हुए
पांव
मगर चलते हैं ,
अपना दुःख 
कब 
किससे कहती है |


Monday, April 4, 2016

एक गीत -चांदनी थी तुम

चित्र -गूगल से साभार 



एक गीत -चांदनी थी तुम 
चांदनी थी 
तुम ! धुँआ सी 
हो गयी तस्वीर | |
मन तुम्हारा 
पढ़ न पाए 
असद ,ग़ालिब ,मीर |

घोंसला  तुमने 
बनाया 
मैं परिंदों सा उड़ा ,
वक्त की 
पगडंडियों पर 
जब जहाँ चाहा मुड़ा .
और तेरे 
पांव में 
हर पल रही जंजीर |

खनखनाते 
बर्तनों में 
लोरियों में गुम रही .
घन  अँधेरे में 
दिए की लौ 
सरीखी तुम रही ,
आंधियां 
जब भी चलीं 
तुम हो गयी प्राचीर |

पत्थरों में भी 
अनोखी 
मूर्तियाँ गढ़ती रही ,
एक दस्तावेज 
अलिखित 
रोज तुम पढ़ती रही ,
ताल के 
शैवाल में तुम 
खिली बन पुण्डीर |

Friday, April 1, 2016

एक गीत -शहर फूस के

चित्र -गूगल से साभार 




क गीत -शहर फूस के 

फूल -तितलियाँ 
खुशबू भी है 
लेकिन मन में गीत नहीं है |
जो हँसता -रोता हो 
संग -संग 
शायद ऐसा  मीत नहीं है |

आँखे -नींद 
यामिनी सुंदर 
लेकिन सपने टूट गए  हैं,
दूर निकल जाने 
की जिद में 
परिचित रस्ते छूट गए हैं ,
अब न हारने का 
कोई ग़म और 
जीत भी जीत नहीं है |

शहर फूस के 
और सुलगती 
सिगरेटों के आसमान हैं ,
ओहदों की 
कुण्डी लटकाए 
रिश्ते -नाते घर -मकान हैं ,
हंसी -ठहाके 
महफ़िल सब है 
लेकिन वह संगीत नहीं है |
चित्र -गूगल से साभार