Saturday, May 14, 2016

पुस्तक विमोचन -समय -समय पर - पंडित केशरी नाथ त्रिपाठी महामहिम राज्यपाल पश्चिम बंगाल के विचारों /भाषणों का संग्रह


पुस्तक  समय -समय पर का  इलाहाबाद संग्रहालय में विमोचन महामहिम राज्यपाल
 प ० बंगाल पंडित केशरी नाथ त्रिपाठी के विचारों और भाषणों का संकलन सम्पादक
डॉ यास्मीन सुल्ताना नकवी सबसे बाएं डॉ यास्मीन पंडित हृदय नारायण दीक्षित
 माननीय श्री केशरीनाथ त्रिपाठी गवर्नर पश्चिम बंगाल पंडित शिव गोपाल मिश्र
और सबसे दायें संग्रहालय के निदेशक श्री राजेश पुरोहित 


पंडित केशरी नाथ त्रिपाठी महामहिम राज्यपाल पश्चिम बंगाल के विचारों /भाषणों का संग्रह पुस्तकाकार रूप में समय समय पर नाम से प्रकाशित 
विमोचन के बाद पुस्तक पर प्रथम वक्ता के रूप में बोलते हुए कुलपति
राजर्षि टंडन मुक्त विश्व विद्यालय प्रो० एम ० पी ० दुबे जी 

आज इलाहाबाद संग्रहालय में पंडित केशरी नाथ त्रिपाठी महामहिम राज्यपाल पश्चिम बंगाल के विचारों /भाषणों का संकलन पुस्तक समय समय पर का विमोचन हुआ और इस पर विमर्श भी हुआ |समारोह का संचालन श्री राजेश मिश्र जी ने विद्वतापूर्ण ढंग से किया |मंच पर अध्यक्षता किया श्री शिव गोपाल मिश्र जी ने मुख्य वक्ता थे प्रखर पत्रकार ,चिंतक राजनेता एवं पूर्व मंत्री श्री हृदय नारायण दीक्षित जी .|संग्रहालय के निदेशक राजेश पुरोहित ने अतिथियों का स्वागत किया |सबसे पहले वक्ता के रूप में प्रोफ़ेसर एम् ०पी ० दुबे कुलपति राजर्षि टंडन ओपन यूनिवर्सिटी इलाहाबाद |मंच पर पुस्तक की सम्पादक डॉ यास्मीन सुल्ताना नकवी मौजूद थी साथ ही किताब महल के प्रकाशक भी थे ,जिन्होंने इस पुस्तक को प्रकाशित किया है | डॉ संजू मिश्र  ने यास्मीन जी को बुक्के देकर सम्मानित किया |श्री हरिमोहन मालवीय ,श्री लालजी शुक्ल ,श्री आशीष त्रिपाठी संपादक हिंदुस्तान ,गौरव कृष्ण वंसल ,शांति चौधरी ,श्री रंजन शुक्ल ,श्री अवधेन्द्र प्रसाद मिश्र श्री नवीन संतोष जैन  विनोद शुक्ल ,प्रकाश त्रिपाठी सहित तमाम विद्वतजन मौजूद थे |
पुस्तक समय -समय पर 


समय समय पर 
समय -समय पर कब ,कहाँ और क्यों ?यह एक लम्बे समय की बीती बातें हैं |यह लम्बा अन्तराल काफी है |देश की सेवा में संलग्न रहते ,कविता करते कविता करते मंत्री पद सम्हालते ,वकालत करते सामाजिक सम्बन्धों का निर्वहन करते हुए तथा पन्द्रह वर्षों तक विधान सभा के अध्यक्ष पद का भार सँभालते हुए ,विधान सभा के उतर चढ़ाव का सामना करते हुए ,सभी पक्षों को समन्वित करते हुए अपने कर्तव्यों में सक्रिय भागीदारी के मध्य जो भाव और विचार आये वह इस ग्रन्थ 
'समय -समय पर 'में प्रस्फुटित हुए हैं | लेखक द्वारा आत्मकथ्य 


पुस्तक का नाम   समय -समय पर 

सम्पादक डॉ यास्मीन सुल्ताना नकवी और रामाश्रय सविता 

प्रकाशक -किताब महल 

मूल्य -550

2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (16-05-2016) को "बेखबर गाँव और सूखती नदी" (चर्चा अंक-2344) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. केसरी नाथ जी जैसे राजनेताओं के दम पर राजनीति का उजला पक्ष दिखता है प्रणाम

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