Thursday, February 26, 2015

एक गीत -होली

चित्र -गूगल सर्च इंजन से साभार 

[यह पुराना गीत है आप सब अपनी बहुमूल्य टिप्पणी इस गीत पर दे चुके हैं ]


आम  कुतरते हुए सुए से 

आम कुतरते हुए सुए से 
मैना कहे मुंडेर की |
अबकी होली में ले आना 
भुजिया बीकानेर की |

गोकुल ,वृन्दावन की हो 
या होली हो बरसाने की ,
परदेशी की वही पुरानी 
आदत है तरसाने की ,
उसकी आंखों को भाती है 
कठपुतली आमेर की |

इस होली में हरे पेड़ की 
शाख न कोई टूटे ,
मिलें गले से गले ,पकड़कर 
हाथ न कोई छूटे ,
हर घर -आंगन महके खुशबू 
गुड़हल और कनेर की |

चौपालों पर ढोल मजीरे 
सुर गूंजे करताल के ,
रूमालों से छूट न पायें 
रंग गुलाबी गाल के ,
फगुआ गाएं या फिर बांचेंगे 
कविता शमशेर की |
चित्र -गूगल सर्च इंजन से साभार
[मेरा दूसरा गीत अमर उजाला के २० मार्च २०११ के साप्ताहिक परिशिष्ट जिंदगी लाइव में प्रकाशित हो चुका है |इस गीत को प्रकाशित करने के लिए जाने माने कवि /उपन्यासकार एवं सम्पादक साहित्य अरुण आदित्य जी  का विशेष आभार]
[दूसरा  गीत   नरेंद्र व्यास जी के आग्रह पर  लिखना पड़ा, इसलिए यह गीत उन्हीं को समर्पित  कर रहा हूँ ]

Saturday, February 14, 2015

एक प्रेम गीत --फूलों में रंग रहेंगे


चित्र -पेंटिंग -गूगल से साभार 



एक प्रेमगीत 
फूलों में रंग रहेंगे ....

जब तक 
तुम साथ रहोगी 
फूलों में रंग रहेंगे ,
जीवन का 
गीत लिए हम 
हर मौसम संग रहेंगे |

जब तक 
तुम साथ रहोगी 
मन्दिर में दीप जलेंगे ,
उड़ने को 
नीलगगन में 
सपनों को पंख मिलेंगे ,
तू नदिया 
हम मांझी नाव के 
धारा के संग बहेंगे |

जब तक 
तुम साथ रहोगी 
एक हंसी साथ रहेगी ,
मुश्किल 
यात्राओं में भी 
खुशबू ले हवा बहेगी ,
जब तक 
यह मौन रहेगा 
अनकहे प्रसंग रहेंगे |


तुमसे ही 
शब्द चुराकर 
लिखते हैं प्रेमगीत हम ,
भावों में 
डूब गया मन 
उपमाएं हैं कितनी कम ,
तोड़ेंगे 
वक्त की कसम 
तुमसे कुछ आज कहेंगे |
चित्र -गूगल से साभार