Sunday, October 7, 2012

एक प्रेमगीत -आधा कप चाय और आधा कप प्यार

चित्र -गूगल से साभार 
एक प्रेमगीत -आधा कप चाय और आधा कप प्यार 
आधा कप 
चाय और 
आधा कप प्यार |
चुपके से 
आज कोई 
दे गया उधार |

सांकल को 
बजा गयी 
सन्नाटा तोड़ गई ,
यादों की 
एक किरन 
कमरे में छोड़ गई ,
मौन की 
उँगलियों से 
छू गया सितार |

सम्मोहन 
आकर्षण 
मोहक मुस्कान लिए ,
तैर गई 
खुशबू सी 
वो मगही पान लिए ,
लहरों ने 
तोड़ दिया 
अनछुआ कगार |

परछाई 
छूने में 
हम हारे या जीते ,
सूरज के 
साथ जले 
चांदनी कहाँ पीते ,
अनजाने में 
मौसम 
दे गया बहार |

वृन्दावन 
होता मन 
गोकुल के नाम हुआ ,
बोझिल 
दिनचर्या में 
एक सगुन काम हुआ ,
आना जी 
आना फिर 
वही शुक्रवार |

जीवन का 
संघर्षों से 
वैसे नाता है ,
कभी -कभी 
लेकिन यह 
प्रेमगीत गाता है ,
कभी यह 
वसंत हुआ 
कभी रहा क्वार |
चित्र -गूगल से साभार 

12 comments:

  1. बेहतरीन भाव उम्दा प्रेम गीत,,,

    RECENT POST: तेरी फितरत के लोग,

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  2. सांकल को
    बजा गयी
    सन्नाटा तोड़ गई ,
    यादों की
    एक किरन
    कमरे में छोड़ गई ,
    मौन की
    उँगलियों से
    छू गया सितार |

    ...bahut sundar geet tushar ji premmayi ho gaya sansaar ,hamko shabdo ki abhivyakti se pyar .

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  3. बहुत ही प्रेमपूर्ण गीत..कोमल..

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  4. आधा कप चाय और आधा कप प्यार .... बहुत प्यारा गीत ...


    यह प्रेमगीत गता है ..... गाता कर लें ।

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  5. बहुत खूबसूरत नवगीत है तुषार जी, बधाई स्वीकारें

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  6. संगीता जी जल्दी -जल्दी टाइप करने में छूट गया था |ध्यान दिलाने हेतु आभार |भाई धीरेन्द्र जी ,शशि जी अग्रज प्रवीण जी ,भाई धर्मेन्द्र जी आप सभी का बहुत -बहुत आभार |

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  7. दिल को हौले हौले से सहलाकर भव विभोर कर गई आपकी यह प्यारी सी रचना.... बहुत सुन्दर!

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  8. सम्मोहन
    आकर्षण
    मोहक मुस्कान लिए ,
    तैर गई
    खुशबू सी
    वो मगही पान लिए ,
    लहरों ने
    तोड़ दिया
    अनछुआ कगार द्य

    आपके गीत मुझे बहुत पसंद हैं।
    हर बार शिल्प और प्रतीकों की नवीनता मन मोह लेती है।

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  9. ''आधा कप चाय और आधा कप प्यार ''वाह क्या बात है; तुषार जी ! ताजे फूलों की सी सुगंघ बिखेरता ताजगी भरा गीत ;पढ़कर आनंद आ गया .

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  10. इस नवगीत में कुछ अनूठे और नवीन प्रयोग किए गए हैं, जो मन को हर्षित करते हैं।

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  11. अहः हा हा हा भाई शब्दों की जादूगरी कोई आपसे सीखे...कमाल करते हैं...बेहद खूबसूरत भाव शब्द और शिल्प...दीवाना बना दिया...बधाई स्वीकारें

    नीरज

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