Wednesday, August 8, 2012

वर्दी के भीतर एक शायर -इश्क सुल्तानपुरी

युवा शायर -इश्क सुल्तानपुरी 
संपर्क -09415308956
पुलिस के सीने में भी दिल धड़कता है |उसका दिल भी भावों से भरा होता है लेकिन वह कार्य की प्रकृति के चलते कब इंसान से कुछ और हो जाता है यह उसे भी नहीं पता चलता है |लेकिन अगर वर्दी के भीतर कविता जन्म ले ले तो वर्दी के भीतर भी इंसानियत सहेज कर रक्खी जा सकती है कुछ लोग इसे सहेजने में कामयाब भी हुए हैं |उन्हीं लोगों में एक युवा शायर हैं इश्क सुल्तानपुरी |इश्क सुल्तानपुरी का वास्तविक नाम कणव् कुमार मिश्र | इश्क सुल्तानपुरी का जन्म 03 अक्टूबर 1976 को  पूरब गांव [गौरीगंज जनपद सुल्तानपुर में हुआ था |इलाहाबाद विश्व विद्यालय से राजनीति शास्त्र में एम० ए० और एल०एल०बी० के साथ ही इग्नू से डिप्लोमा इन टूरिज्म करने के बाद इश्क सुल्तानपुरी यानि के० के० मिश्र उत्तर प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक  पद पर तैनात हुए |इस समय के० के० मिश्र जी उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद के जफराबाद थाने में एस० ओ० थानाध्यक्ष के पद को सुशोभित कर रहे हैं |हम इस होनहार युवा शायर के उत्साहवर्धन के लिए यहाँ कुछ ग़ज़लें पोस्ट कर रहे हैं | 
युवा शायर इश्क सुल्तानपुरी की तीन ग़ज़लें 
एक 
दर्द उठता है आह उठती है 
दिल पिघलता है चाह उठती है 

जब मोहब्बत का असर होता है 
जहाँ से रस्मो -राह उठती है 

जगे जो देर तक सुबह उनकी 
रफ्ता -रफ्ता निगाह उठती है 

यहाँ बदनाम खुदा होता है 
गरीबी जब कराह उठती है 

इश्क का दर्द जिस गज़ल में हो 
उसपे महफ़िल से वाह उठती है 
दो 
हँसता चेहरा नज़र कटारी सी 
एक तस्वीर है तुम्हारी सी 

तुमसे मिलकर के रात भर जागे 
सहर के बाद है खुमारी सी 

अब तलक थी विसाल की उलझन 
अब है जाने की बेकरारी सी 

आज मिलना बिछड़ना है कल से 
तेरी हालत भी है हमारी सी 

हर एक लम्हा नागवार हुआ 
हुई है इश्क की बीमारी सी 
तीन 
अपने हक में कम रहता है 
हम सबको ये गम रहता है 

इंसा बेहतर हो जाने की 
कोशिश में हरदम रहता है 

मेरे गम की फ़िक्र है किसको 
मेरा गम तो कम रहता है 

नहीं है सच कुछ इस दुनिया में 
जो दिखता है कम रहता है 
चित्र -गूगल से साभार 

4 comments:

  1. बहुत ही प्रभावी रचना..परिचय कराने का आभार..

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  2. बहुत बेहतरीन रचना..
    परिचय हेतु आभार..
    :-)

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  3. Badaa hee achha parichay karaya aapne!

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  4. बहुत ही प्रभावी रचना.

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