Wednesday, November 9, 2011

भारतीय भाषा और संस्कृति की एक झलक-क्रोएशिया

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भारत को जानने के लिए हिंदी सीखना चाहते हैं क्रोए‍शियन
हिंदी विवि में क्रोएशिया से आयी बिल्‍याना ज़र्निच से खास बातचीत
महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा में विदेशी हिंदी शिक्षकों के लिए आयोजित अभिविन्‍यास (ओरिएंटेशन) कार्यक्रम में सहभागिता करने के लिए क्रोएशिया से आयी बिल्‍याना ज़र्निच ने एक खास मुलाकात में कहा कि भारतीय संस्‍कृति मुझे बहुत पसंद है। भारत को जानने के लिए क्रोएशिया के लोग हिंदी सीखना चाहते हैं। उन्‍होंने बताया कि क्रोएशिया में सिर्फ एक जाग्रेब विश्‍वविद्यालय में हिंदी की पढ़ायी होती है। इस विश्‍वविद्यालय में इंडोलॉजी का एक विभाग है जिसमें हिंदी भाषा, हिंदी साहित्‍य, संस्‍कृत भाषा, संस्‍कृ‍त साहित्‍य, पाली, वैदिक भाषा, ब्रज भाषा, अवैस्टिक भाषा, हिन्‍दुस्‍तानी इतिहास, हिंदुस्‍तानी दर्शन, भारतीय कला, भारतीय धर्म, भारतीय नाटक की पढ़ाई होती है। विश्‍वविद्यालय में स्‍नातक के अलावे उच्‍च शैक्षणिक कार्यक्रम के तहत एम.ए. और पीएचडी की पढ़ाई होती है। हिंदी से संबंधित विषय चार साल के दौरान सिखाये जाते हैं। हिंदी से संबंधित सब विषय हिंदी भाषा में सिखायी जाती है।
14 मई 1982 को जन्‍मी बिल्‍याना जाग्रेब विवि में हिंदी भाषा, हिंदी साहित्‍य और ब्रजभाषा की अध्‍यापिका हैं, ने बताया कि क्रोएशिया में हिन्‍दुस्‍तानी लोग भी रहते हैं। हिंदी में अध्‍ययन करने वाले विद्यार्थियों को केवल कक्षा में हिंदी सुनने या बोलने का मौका मिलता है। इसलिए हम कोशिश करते हैं कि जितना हो सके उनके साथ हिंदी में बात करें। हम यह भी कोशिश करते हैं कि हमारे विभाग में हमेशा एक हिन्‍दुस्‍तानी अतिथि प्रोफेसर भी हो। हमारे विद्यार्थी हिंदी सीखने में बहुत रूचि लेते हैं। हर वर्ष चालीस विद्यार्थी इंडोलॉजी में शामिल होते हैं। जो एक छोटे देश के लिए बहुत है। दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारे देश में मीडिया में कोई हिंदी के कार्यक्रम नहीं है। दूसरी बात यह है कि हमारे विद्यार्थी भारत आकर हिंदी पढ़ना चाहते हैं, परन्‍तु वे पैसों के अभाव में नहीं आ पाते हैं। हमारे विभाग और क्रोएशिया में उपस्थित भारतीय राजदूतावास के बीच में बहुत अच्‍छा संबंध है। क्रोएशियन सरकार से उतनी मदद आती जितनी भारतीय राजदूतावास की तरफ से आती है। हिंदी जानने के उत्‍सुक हमारे विद्यार्थियों के सपने पूरे होते।
      उन्‍होंने कहा कि मुझे बड़ी खुशी है कि महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा में विदेशी हिंदी शिक्षकों के लिए अभिविन्‍यास कार्यक्रम चलने लगा है। हिंदी को वैश्विक पटल पर प्रसारित करने की प्रबल इच्‍छा इस विवि की है उतनी ही हमारी भी।  
      गौरतलब है कि महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा विदेशों में हिंदी अध्‍यापन में आ रही दिक्‍कतों से रू-ब-रू होने तथा पाठ्यक्रम निर्माण में एक समन्‍वयक की भू‍मिका निभा रहा है। पिछले जनवरी माह में विदेशी हिंदी अध्‍यापकों के लिए आयोजित अभिविन्‍यास कार्यक्रम में करीब आधे दर्जन से अधिक देशों के अध्‍यापकों ने शिरकत की थी। इसी कड़ी में दस दिनों के अभिविन्‍यास कार्यक्रम में मॉरीशस, श्रीलंका, हंगरी, न्‍यूजीलैण्‍ड, रूस, बेल्जियम, चीन, जर्मनी, क्रोशिया से दस अध्‍यापक सहभागिता कर रहे हैं। कुलपति विभूति नारायण राय ने बताया कि हम विदेश में पढ़ाने वाले हिदी अध्‍यापकों के लिए वर्ष में दो बार अभिविन्‍यास कार्यक्रम चलाएंगे जिससे हम यह जान पायेंगे कि उन्‍हें हिंदी के शिक्षण में क्‍या-क्‍या चुनौतियां आ रही हैं।
-अमित कुमार विश्‍वास

4 Comments:

अनुपमा पाठक said...

बिल्याना ज़र्निच के बारे में जानना अच्छा लगा!
अच्छी प्रस्तुति!

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत अच्छा प्रयास, शुभकामनायें।

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

सराहनीय प्रयास ..अच्छा लगा जानकर ....

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!