Tuesday, October 18, 2011

एक गीत -चम्पई उँगलियों से रोशनी सजाता है

चित्र -गूगल सर्च इंजन से साभार 
चम्पई उँगलियों से रोशनी सजाता है 
एक दीप जलता है 
दूसरा जलाता है |
चम्पई उँगलियों से 
रोशनी सजाता है |

गोरा मुख ढकना मत 
तिमिर को भगायेंगे ,
आज प्रिये !तुमको ही 
चन्द्रमा बनायेंगे ,
संकोचों का दरपन 
कनखियों बुलाता है |

आओ आकाश चलें 
धुआँ -धुन्ध छाँटें  ,
जहाँ तक पहुँच पाये 
रोशनी को बाटें ,
मौसम तो फूलों की 
गंध बस चुराता है |

खुले नये कजरौटे 
चमक बढ़ी आँखों में ,
दीपों के मेले हैं 
बुझे हुए ताखों में ,
मन का जगजीत कहीं 
पंचम सुर गाता है |

खुशबू का शाल ओढ़ 
लौटती हवाएं ,
सबके घर मंगलमय 
वेद हैं ऋचाएँ 
दुधमुहाँ पटाखों से 
चिहुंक -चिहुंक जाता है |

सँवरा ये रूप लिए 
गाँठ नहीं जोड़ना ,
पल भर की पूजा है 
नियम नहीं तोड़ना ,
यज्ञ- धूम उठते ही 
आँचल छू जाता है |
चित्र -गूगल से साभार 

14 Comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुन्दर गीत ... दीवाली के सारे दृश्य प्रस्तुत कर दिए

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी की जा रही है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

अरुण चन्द्र रॉय said...

सुन्दर भावों से सजी गीत

नीरज गोस्वामी said...

खुशबू का शाल ओढ़
लौटती हवाएं ,
सबके घर मंगलमय
वेद हैं ऋचाएँ
दुधमुहाँ पटाखों से
चिहुंक -चिहुंक जाता है

अहाहा...अद्भुत रचना...ढेरों बधाई स्वीकारें...

प्रवीण पाण्डेय said...

बड़ा ही प्रभावी चित्रण किया है आपने।

अनुपमा पाठक said...

सुन्दर गीत!

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बहुत सुन्दर गीत ...

Navin C. Chaturvedi said...

चित्र से उद्भूत सुंदर कविता
बधाई स्वीकारें तुषार जी

जयकृष्ण राय तुषार said...

भाई नवीन जी कविता पहले लिखी गयी चित्र बाद में तलाश किया गूगल से |

Ankur jain said...

sundar geet.........

ऋता शेखर 'मधु' said...

भावपूर्ण गीत...

दिगम्बर नासवा said...

प्रेम गीत है सुन्दर भाव लिए ...

रेखा said...

बहुत ही सुन्दर गीत ..

Arvind Mishra said...

भाव प्रवण