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| चित्र -गूगल सर्च इंजन से साभार चम्पई उँगलियों से रोशनी सजाता है |
दूसरा जलाता है |
चम्पई उँगलियों से
रोशनी सजाता है |
गोरा मुख ढकना मत
तिमिर को भगायेंगे ,
आज प्रिये !तुमको ही
चन्द्रमा बनायेंगे ,
तिमिर को भगायेंगे ,
आज प्रिये !तुमको ही
चन्द्रमा बनायेंगे ,
संकोचों का दरपन
कनखियों बुलाता है |
आओ आकाश चलें
धुआँ -धुन्ध छाँटें ,
जहाँ तक पहुँच पाये
रोशनी को बाटें ,
मौसम तो फूलों की
गंध बस चुराता है |
खुले नये कजरौटे
चमक बढ़ी आँखों में ,
दीपों के मेले हैं
बुझे हुए ताखों में ,
मन का जगजीत कहीं
पंचम सुर गाता है |
खुशबू का शाल ओढ़
लौटती हवाएं ,
सबके घर मंगलमय
वेद हैं ऋचाएँ
दुधमुहाँ पटाखों से
चिहुंक -चिहुंक जाता है |
सँवरा ये रूप लिए
गाँठ नहीं जोड़ना ,
पल भर की पूजा है
नियम नहीं तोड़ना ,
यज्ञ- धूम उठते ही




14 Comments:
बहुत सुन्दर गीत ... दीवाली के सारे दृश्य प्रस्तुत कर दिए
इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी की जा रही है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।
सुन्दर भावों से सजी गीत
खुशबू का शाल ओढ़
लौटती हवाएं ,
सबके घर मंगलमय
वेद हैं ऋचाएँ
दुधमुहाँ पटाखों से
चिहुंक -चिहुंक जाता है
अहाहा...अद्भुत रचना...ढेरों बधाई स्वीकारें...
बड़ा ही प्रभावी चित्रण किया है आपने।
सुन्दर गीत!
बहुत सुन्दर गीत ...
चित्र से उद्भूत सुंदर कविता
बधाई स्वीकारें तुषार जी
भाई नवीन जी कविता पहले लिखी गयी चित्र बाद में तलाश किया गूगल से |
sundar geet.........
भावपूर्ण गीत...
प्रेम गीत है सुन्दर भाव लिए ...
बहुत ही सुन्दर गीत ..
भाव प्रवण
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