Sunday, March 13, 2011

गज़ल -होली मनाइये

चित्र -गूगल सर्च इंजन से साभार 
होली मनाइये 


यह वर्ष बेमिसाल है होली मनाइये 
हर शख्स तंग हाल है होली मनाइये

मनमोहनी हंसी ने रुलाकर के रख दिया 
सौ रूपये में दाल है होली मनाइये 


कुर्सी महल कलमाड़ी के हिस्से में दोस्तों 
अपने लिए पुआल है होली मनाइये 


रंगों में है  घोटाला मिलावट अबीर में 
महँगा भले गुलाल है होली मनाइये 


फागुन भी कटघरे में बसंती भी जेल में 
मौसम भी ये दलाल है होली मनाइये 


राहुल जी राज छोड़के घरवाली लाइए 
ये उम्र का सवाल है होली मनाइये 


भारी है पेट गडकरी गुझिया न खाइए 
पार्टी का खस्ता हाल है होली मनाइये

अबकी कैटरीना कैफ भी  होली के मूड में 
सादा बस एक गाल है होली मनाइये 


हाथों में ले अबीर अमर सिंह न बैठिये 
घर में भले बवाल है होली मनाइये

बहुमत में लौटकर के बहिन जी फिर आइये 
हाथी का सब कमाल है होली मनाइये 


राधा शहर में बस गयी कान्हा विदेश में 
बरसाने में अकाल है होली मनाइये


सत्ता का चेहरा हो गया पीला तो क्या हुआ 
जनता का चेहरा लाल है होली मनाइये 


पाले में नंगा जिस्म ले मरता रहे किसान 
मस्ती में लेखपाल है होली मनाइये 


जंगल का हाल उड़ते परिंदों से पूछिए 
गिरवीं हरेक डाल है होली मनाइये 


पी करके भाँग  सो रही संसद विधायिका 
अपना किसे खयाल है होली मनाइये 
चित्र -गूगल सर्च इंजन से साभार 
[बुरा न मानो   होली है|यह मेरी पुरानी गज़ल है ,इसे संशोधन के द्वारा समसामयिक बनाया गया है  ]

5 comments:

  1. बहुत सुन्दर गज़ल..हरेक शेर बहुत सार्थक और सटीक..

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  2. उम्दा ग़ज़ल लिखी है tushar ji ...

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  3. पाले में नंगा जिस्म ले मरता रहे किसान
    मस्ती में लेखपाल है होली मनाइये

    मनानी तो पडेगी, देश के हालात पर रोकर या हँसकर, कैसे भी?

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  4. रंगों में है घोटाला मिलावट अबीर में
    महँगा भले गुलाल है होली मनाइये ..

    कैसे मनाएँ ऐसे में होली ... आप ही बताइए ...

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