Sunday, October 10, 2010

प्रोफेसर वशिष्ठ अनूप की दो गजलें


कवि/ लेखक प्रोफेसर वशिष्ठ अनूप
प्रोफेसर हिन्दी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी
ईमेल : vanoopbhu09@gmail.com
मोबाइल : 09415895812

प्रोफेसर वशिष्ठ अनूप हिन्दी कविता के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। स्वभाव से विनम्र और मिलनसार इस महान कवि/ लेखक का जन्म 1 जनवरी 1962 को उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण जनपद गोरखपुर के सहडौली (दुबेपुरा गांव) में हुआ। पी०एच०डी० और डी०लिट्‌ उपाधियों से सम्मानित इस कवि/ लेखक की अब तक प्रकाशित पुस्तकें हैं - बन्जारे नयन (2000), रोशनी खतरे में है (2006), रौशनी की कोपलें (2010), गजल-संग्रह। हिन्दी की जनवादी कविता, जगदीश गुप्त का काव्य-संसार, हिन्दी गजल का स्वरूप और महत्वपूर्ण हस्ताक्षर, हिन्दी गजल की प्रवृत्तियां, हिन्दी गीत का विकास और प्रमुख गीतकार, हिन्दी साहित्य का अभिनव इतिहास, हिन्दी भाषा, साहित्य एवं पत्रकारिता का इतिहास, 'अंधेरे में' : पुनर्मूल्यांकन, 'असाध्यवीणा' की साधना साहित 28 पुस्तकों का लेखन व सम्पादन। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में गीत, गजल, कविता, कहानी और समीक्षाएं प्रकाशित। प्रो० वशिष्ठ अनूप की दो गजलें हम अपने पाठकों के साथ साझा कर रहे हैं -



(1)
जिक्र आया तुम्हारा तो अच्छा लगा

गांव-घर का नजारा तो अच्छा लगा,
सबको जी भर निहारा तो अच्छा लगा।

गर्म रोटी के ऊपर नमक-तेल था
माँ ने हँसकर दुलारा तो अच्छा लगा।

अजनबी शहर में नाम लेकर मेरा
जब किसी ने पुकारा तो अच्छा लगा।

एक लड़की ने बिखरी हुई जुल्फ को
उँगलियों से संवारा तो अच्छा लगा।

हर समय जीतने का चढ ा था नशा
अपने बेटे से हारा तो अच्छा लगा।

रेत पर पाँव जलते रहे देर तक
जब नदी ने पखारा तो अच्छा लगा।

एक खिड की खुली, एक परदा उठा
झिलमिलाया सितारा तो अच्छा लगा।

दो हृदय थे, उफनता हुआ सिन्धु था
बह चली नेह-धारा तो अच्छा लगा।

चाँद-तारों की, फूलों की चर्चा चली
जिक्र आया तुम्हारा तो अच्छा लगा।



(2)
तेरे पास ही कृष्ण की बांसुरी है

हँसी फूल-सी और बदन मरमरी है
किसी जादूगर की तू जादूगरी है

है लगता कभी सिन्धु-मंथन से निकली
है लगता कभी स्वर्ग की तू परी है।

बताती है मुस्कान तेरे लबों की
तेरे पास ही कृष्ण की बांसुरी है।

तुम्हारे बिना मानती ही नहीं यह
करे क्या कोई प्रीति ही बावरी है।

ये बंजारापन जाने कब तक चलेगा
मेरे साथ ये कैसी आवारगी है।

न जाने कभी फिर मिलें ना मिले हम
न शरमाइये यह विदा की घड़ी है।

दुआ कीजिए इसको मिल जाये मंजिल
समंदर की लहरों पे नन्हीं तरी है।




चित्र bipinsoni.com से साभार

39 comments:

  1. sir prof.vashist anoop ki ghazlen bahut behtareen hai badhai aapko ranjana singh

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  2. sir very nice sudha yadav

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  3. sir adbhut ajay mishra

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  4. sir veri nice post priyanka sahu

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  5. गर्म रोटी के ऊपर नमक-तेल था
    माँ ने हँसकर दुलारा तो अच्छा लगा।

    BAHUT BADHIYA GAZALEIN HAIN

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  6. बहुत सुन्दर गज़लें हैं ..

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  7. चांद-तारों की,फूलों की चर्चा चली,
    जिक्र आया तुम्हारा तो अच्छा लगा।

    बेहतरीन शे‘रों से सजी बेहतरीन ग़ज़लें।

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  8. कविता को आपने बह्त ही सुन्दर शब्दो से सजाया है ………………बहुत अच्छ लगा पढकर्……॥

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  9. aapki do gazalen padhi to achchha laga.

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  10. वशिष्ट जी से मिलकर अच्छा लगा ...अच्छा रचते हैं आप.

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  11. अजनबी शहर में नाम लेकर मेरा
    जब किसी ने पुकारा तो अच्छा लगा।
    बहुत खूब. पूरी गज़ल ही बहुत सुन्दर है.

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  12. badhai tushar ji v anoop ji ka parichay aur ghazalen manbhavan hain yash malviya

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  13. वाह बहुत सुन्दर ..बहुत पसंद आई यह इस्नको पढवाने के लिए शुक्रिया

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  14. वाह ! बहुत बढ़िया! शानदार गज़ल!

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  15. हर समय जीतने का चढ ा था नशा
    अपने बेटे से हारा तो अच्छा लगा।

    Beautiful couplets !

    .

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  16. बहुत सुन्दर रचनाएँ ....
    ____________________
    'पाखी की दुनिया' के 100 पोस्ट पूरे ..ये मारा शतक !!

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  17. ग़ज़ल पढ़े सोचा-विचार.... तो अच्छा लगा!
    आशीष
    --
    प्रायश्चित

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  18. संशोधित टिपण्णी:
    ग़ज़ल पढ़े सोचा-विचारा.... तो अच्छा लगा!
    आशीष
    --
    प्रायश्चित

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  19. दोनों ही रचनाएँ सुंदर हैं.... पहली रचना के ज़मीन से जुड़े भाव और दूसरी में प्रेम की पावन अनुभूति..... धन्यवाद इन्हें हम तक पहुचाने के लिए ....

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  20. दोनों ही रचनाएँ सुंदर हैं.... पहली रचना के ज़मीन से जुड़े भाव और दूसरी में प्रेम की पावन अनुभूति..... धन्यवाद इन्हें हम तक पहुचाने के लिए ....

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  21. Nice picture! Just wanted to thank you for visting my blog and your gracious comment. Take Care!

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  22. धन्यवाद सुंदर ग़ज़लें पढ़वाने के लिए.

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  23. बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!

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  24. dono gazle behd pasand aai . sundar

    regards

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  25. bahut khoob ......

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  26. This comment has been removed by the author.

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  27. अनूप जी की रचनाओं से हमारा साक्षात्कार कराने के लिए धन्यवाद.

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  28. Very touching lines..


    Thanks to the writer for adding such beautiful gazals in the world of Hindi...

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  29. Both the Gazals are very nice..

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  30. बहुत सुन्दर. पढ़ कर अच्छा लगा

    Dheeraj

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  31. चाँद-तारों की, फूलों की चर्चा चली
    जिक्र आया तुम्हारा तो अच्छा लगा।


    पढ़ कर अच्छा लगा. दोनों ही रचनाएँ सुंदर हैं. बहुत सुन्दर.


    Dheeraj

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  32. Anonymous comment karne wale dosto kripaya apana nam jarur likhen

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  33. Bahut khubsurat gazalen...bahut-bahut badhai..

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  34. aap ki gazal [padh kar bhaut achha laga

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  35. तुषार जी इतनी उम्दा गज़लों को हम तक पहुचाने के लिए धन्यवाद ....... अनूप सर का तो जवाब नहीं ...........

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  36. वाह सर जी बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है बधाई स्वीकारें

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